कांग्रेस कांग्रेस से हारी
140 वें साल में कदम रखती पार्टी, पिछले ग्यारह वर्षों से धरातल में गिरी पड़ी है, जिसे भाजपा की इच्छा, रसातल में ले जाने की है। अपने ही आस-पासू मकड़ी के जाल सी उलझी पार्टी, वास्तव में आज अपने अस्तित्व के लिए स्वंय से ही लड़ रही है। अगर कोई यह कहे कि कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला है, और भाजपा कांग्रेस को हरा रही है, तो यकिन किजिए यह सत्य नहीं. वास्तविकता में कांग्रेश का मुकाबला स्वयं कांग्रेस से हैं। भाजपा की मजबूती नहीं कांग्रेश कि कमजोरी उसे हार का मुंह दिखा रही है।1977 आपात काल के बाद पहला चुनाव और श्रीमती इंदिरा गांधी जी का नाम। कांग्रेस- 154 सीटों पर विजय हुई। आज क्या पार्टी की हालात इतनी सोचनीय हो गई कि पार्टी 50 सीटों तक गिर गई।
क्या पार्टी ने इस ओर विचार किया? क्या पार्टी कुछ बिन्दु पर विर्मश करेंगी? जो कि तर्क संगत है।
पहला - क्या पार्टी वैचारिकता के साथ आगे बढ़ रही है?
दूसरा - पार्टी-गांधीवाद, समाजवाद एवं इंदिरा नीति पर हैं?
तीसरा - पार्टी संवादहीन तो नहीं हो गई ?
चौथा - पार्टी और जनता के बीच खाई तो नहीं बढ़ गई ?
आज राहुल गांधी, मल्लिकाअर्जुन जी और अन्य को इन बिंदु चर्चा करनी चाहिए।
#कांग्रेस
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