Wednesday, March 5, 2025

कांग्रेस कांग्रेस से हारी

  140 वें साल में कदम रखती पार्टी, पिछले ग्यारह वर्षों से धरातल में गिरी पड़ी है, जिसे भाजपा की इच्छा, रसातल में ले जाने की है। अपने ही आस-पासू मकड़ी के जाल सी उलझी पार्टी, वास्तव में आज अपने अस्तित्व के लिए स्वंय से ही लड़ रही है। अगर कोई यह कहे कि कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला है, और भाजपा कांग्रेस को हरा रही है, तो यकिन किजिए यह सत्य नहीं. वास्तविकता में कांग्रेश का मुकाबला स्वयं कांग्रेस से हैं। भाजपा की मजबूती नहीं कांग्रेश कि कमजोरी उसे हार का मुंह दिखा रही है।1977 आपात काल के बाद पहला चुनाव और श्रीमती इंदिरा गांधी जी का नाम। कांग्रेस- 154 सीटों पर विजय हुई। आज क्या पार्टी की हालात इतनी सोचनीय हो गई कि पार्टी 50 सीटों तक गिर गई। 

क्या पार्टी ने इस ओर विचार किया? क्या पार्टी कुछ बिन्दु पर विर्मश करेंगी? जो कि तर्क संगत है।

पहला - क्या पार्टी वैचारिकता के साथ आगे बढ़ रही है? 

दूसरा - पार्टी-गांधीवाद, समाजवाद एवं इंदिरा नीति पर हैं?

तीसरा - पार्टी संवादहीन तो नहीं हो गई ?

चौथा - पार्टी और जनता के बीच खाई तो नहीं बढ़ गई ?

आज राहुल गांधी, मल्लिकाअर्जुन जी और अन्य को इन बिंदु चर्चा करनी चाहिए।

#कांग्रेस 

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Sunday, February 9, 2025

कार्यकर्ता


किसी भी युद्ध में जीत-हार से पहले, जरूरत होती है युद्ध लड़ने की, कोई भी युद्ध, कोई भी युद्ध बिना सैनिक के नहीं लड़ा जा सकता। मुझे नहीं लगता है कि Congress पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जो मुझसे कहीं अधिक ज्ञानी है, इस बात से अनभिज्ञ होगे, चुनावी रण में, किसी भी पार्टी के लिए उसका कार्यकर्ता, एक सैनिक की तरह होता है।॥ एक चुनावी प्रक्रिया में उसका प्रयास ही जीत-हार की तस्वीर स्पष्ट करता है। मुझे  देख कर अति आश्च‌र्य होता है कि आज कांग्रेस जैसी मजबुत पार्टी, जमीनी कार्यकती विहिन सी है। कई बूथों पर हाल यह है कि पार्टी का झंडा उठाने वाला तक नहीं है। और इसके बावजूद पार्टी पदाधिकारी, विधायक और सांसद निश्चिन्त होकर, कुम्भकर्ण नीद में है।

 आज परेशानीयो से भरी जनता , जब उलझनों से घिरी किसी सहारे की बाट जोह रही हैं, एक भी कॉन्ग्रेसी नहीं जो उसके पास जा, सांत्वना का हाथ रख सके।

पार्टी एक बार फिर उठ कर खड़ी हो और मैदान में पूरी तैयारी से उत्तरे तो बेहतर, वरना यकिन मानिये 2029 तक पार्टी में सिवा खाली कुर्सी के कुछ ना बचेगा।


Satish Shiv Singh Khadka


क्रमश:

Saturday, February 8, 2025

स्पष्ट विजन

 स्पष्टता


महाभारत युद्ध का बिगुल, कुरुक्षेत्र के मैदान में बज चुका था, दोनों और की सेनायें और महारथी, रणक्षेत्र में आमने-सामने आ चुके थे, तभी अचानक युधिष्ठर अपने रथ से उतर कर, रण भुमि के मध्य की ओर पैदल ही चलने लगे, दोनों तरफ के लोग उन्हें आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे। युधिष्ठिर रणभूमि के बीचो बीच आकर, तेज स्वर् में बोले आज हम सब धर्म-अधर्म की इस लड़ाई में कुरुक्षेत्र में आ खड़े हुए हैं। जिनको जिनको भी लगता है कि इस युद्ध में , पांडव धर्म के लिए लड़ रहे है, वह इस तरफ मेरे पीछे आ खड़े हो, और जिनको लगता है कि कौरव धर्म के लिए लड़ रहें हैं,तो वो मेरे सामने आ खड़े हो। एक बार यह हो जाये तो, यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन किस ओर हैं।

स्पष्टता, आज इसी तरह की स्पष्टता की जरूरत कांग्रेस पार्टी को है।

भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी, आज स्पष्ट नीतियां ना होने की वजह से, स्वयं में ही उलझी पड़ी है।


सतीश खड़का 

Friday, February 7, 2025

महत्व पूर्ण बिंदु

 १- पार्टी को मजबूत बनाने वाली नीतियां अपनानी होगी।

२  जमीनी कार्यकर्ताओ को मजबूत बनाने के कार्यकर्म चलाने होगे।

३ हर बूथ पर कम से कम दस युवक युवतियों का एक्टिव ग्रुप बनाना होगा।

४ सभी नीचे से ऊपर तक के पद चुनाव प्रक्रिया द्वारा चुने जाए।

५ गांधीवाद और समाजवाद पर चर्चा शुरू की जाए।

६ पार्टी राष्टीय पार्टी की गरिमा बनाए और अपने दम पर पूरे देश में चुनाव लड़े।

७ त्वरित और कड़े फैसले लेने को तैयार रहे।

८ लोगों के बीच जा लोगों से बात करें, जनता से जुड़े बिना जीत दर्ज नहीं हों सकती।

९  आओ मिलकर आगे बढ़ें।


जय कांग्रेस विजय कांग्रेस 

Thursday, February 6, 2025

चमत्कार

अगर किसी को यह गलत फहमी है कि मोदी मैजिक नाम की कोई लहर है, तो यह सिर्फ उसका वहम है ।आज कांग्रेस की वर्तमान स्थिति की वजह खुद कांग्रेस है।

BJP "ने चालाकी से  टूक बाल फेकी और कांग्रेस ने हर बाल पर उसे छःरन दिए। पार्टी प्रवक्ता को यह समझना चाहिए था कि हर बात पर बोलना जरूरी है, लेकिन कभी खामोशी और तटस्थ हो जाना भी फायदे मंद रहता है।

बीजेपी मुद्दे उछालती, कांग्रेस फोरन बैटिंग शुरु कर देती। यह रणनीति bjp के लिए सबसे फायदेमंद साबित हुई, कांग्रेस कई ऐसे मुद्दे, जिनसे लाभांश ले सकती थी या उस मुद्दे को उछलने से रोककर bjp को लाभ लेने से रोक सकती थी , लेकिन कमज़ोर नीतियों के कारण बीजेपी को लाभ लूटने का मौका दिया।

यकिन मानिये, आज आदरणीय इन्दीरा गाँधी जी होती तो,यह झूठ के बल चलती सरकार को अपनी रणनीतीयों से धारा शाही कर देती,

1975 के आपात काल के बाद ,सरकार पर काबिज जनता पार्टी को मात्र दो साल के बाद, जो चारों खाने चित किया, उसे राजनीतिज्ञ समाज ने चमत्कार कि संज्ञा दी।

इंद्रा गांधी जी मैं जनता से जुड़ जाने की क्वालिटी थी, और यहीं उनका चमत्कार था।


क्रमश   

Coming soon....

Wednesday, February 5, 2025

दो शब्द


दो शब्द


2014 में हार के बाद शनैः शनैः पार्टी की स्तिधि काफी दयनीय हो चुकी है, पार्टी में चारों तरफ अविश्वास और घबराहट सी फैली है। मौका परस्त पार्टी होड़-छोड़ कर भाग रहे है, पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। कई दिग्गज डबल गेम खेल रहे है, 

2014 के बाद हुए हर चुनाव में ज्यादात‌र पार्टी ने सिर्फ हार का मुंह देखा है।


काग्रेश के लिए आज जो सबसे बड़ा चैलेंज है वो पार्टी के भीतर विश्वास भरना, उसे आज भी सम्मान और विश्वास करने वाली जनता में और जमीनी कार्यकर्ताओ में नई ऊर्जा और जान फूंक ने की रणनीति बनाने की।


कई भ्रमों के बीच पार्टी, स्वंय में उलझी सी है। अस्पष्ट नीति आपस में टकराती लीडरशीप ने ,पार्टी को कमजोर कर दिया है।

जमीनी स्तर पर देखें तो जैसे पार्टी नदारद सी है, आज क्या पार्टी एक बार फिर चमत्कार कर सकती ?क्या 1977 का वो शब्द जो माननीय इंदिरा गांधी जी के लीडरशीप के लिए कहा गया था, फिर दोहराया जाएगा " चमत्कार "


Satish shiv singh Khadka

9837017847 8923927777


1 - Welcome


 Indian National Congress 

137 सालो से अडिग खड़ी है, या सिर्फ एक पार्टी नहीं एक विचार हैं, और विचार कभी नहीं मरता।

कॉन्ग्रेस मुक्त भारत की कल्पना करने वालो को मुंह चिढ़ाता पार्टी कार्यकर्ता, आज भी पूरी ताकत ओर विश्वास के साथ खड़ा हे, उसे पूरे विश्वास मैं लाना, ये जिम्मेदारी आज पार्टी के बड़े पदाधिकारी पर हे।


2029 और उसके पहले आने वाले सभी चुनाव पार्टी जीते, इसके लिए जरूरी है बड़े बदलाव।


क्या पार्टी एकजुट और गंभीर है?

Thanks and regards