स्पष्ट विजन
स्पष्टता
महाभारत युद्ध का बिगुल, कुरुक्षेत्र के मैदान में बज चुका था, दोनों और की सेनायें और महारथी, रणक्षेत्र में आमने-सामने आ चुके थे, तभी अचानक युधिष्ठर अपने रथ से उतर कर, रण भुमि के मध्य की ओर पैदल ही चलने लगे, दोनों तरफ के लोग उन्हें आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे। युधिष्ठिर रणभूमि के बीचो बीच आकर, तेज स्वर् में बोले आज हम सब धर्म-अधर्म की इस लड़ाई में कुरुक्षेत्र में आ खड़े हुए हैं। जिनको जिनको भी लगता है कि इस युद्ध में , पांडव धर्म के लिए लड़ रहे है, वह इस तरफ मेरे पीछे आ खड़े हो, और जिनको लगता है कि कौरव धर्म के लिए लड़ रहें हैं,तो वो मेरे सामने आ खड़े हो। एक बार यह हो जाये तो, यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन किस ओर हैं।
स्पष्टता, आज इसी तरह की स्पष्टता की जरूरत कांग्रेस पार्टी को है।
भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी, आज स्पष्ट नीतियां ना होने की वजह से, स्वयं में ही उलझी पड़ी है।
सतीश खड़का

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